शव्द ही कितना अनमोल है. माँ होती ही बहुत प्यारी है और उसके लिये हम...पल भर मे सब जान जाती है वो.हमारी खामोशी या हमारी नाराजगी.हम माँ पर गुस्सा होते हैं वो हमें डांटती हैं पर उसमें भी हमारी भलाई छिपी होती है.जो हमें उस वक्त समझ नही आती.पर एक समय जरूर आता है जब हमें समझ आता है..माँ सही थी...
जहाँ तक मेरी बात है मुझे मेरी अम्मी से बहुत प्यार है और उन्हे मुझसे..उन्होने जिंदगी के हर हर मोड़ पर मेरा साथ दिया है.
मुझे याद है मेरे स्कूल के दिनो मॆ वे मेरे साथ मेरा रिज़ल्ट लेने जाया करती थी.मैं हमेशा क्लास मॆ अच्छे नंबर लाया करती थी .मुझे याद है मेरा बोर्ड का रिज़ल्ट आया था.लिस्ट देखने जानी थी.मुझे डर था पता नहीँ क्या होगा.स्कूल की बात अलग थी ये बोर्ड का रिज़ल्ट था.बार बार मैं पानी पी रही थी.पेट मे अजीब सी मरोड़ हो रही थी.दिल जोरों से धड़क रहा था.....
अम्मी ने समझाया डरो मत जो होगा वो देखा जायेगा.और सब अच्छा होगा.और ना भी हुआ मैं तुम्हारे साथ हूँ हमेशा....
फ़िर हम रिज़ल्ट देखने गये.रास्ते मॆ भी मुझे घबराहट हो रही थी.जब हम स्कूल पहुँचे अम्मी ने जल्दी से भागकर कैंटीन से कोल्ड ड्रिंक ली
.मुझे पिलाई.
अब रिज़ल्ट देखने का वक्त था.लिस्ट लग चुकी थी.हजारो की संख्या मे दूसरे भी रिज़ल्ट देख रहे थे..जब भीड़ थोड़ी कम हुई अम्मी और मैं लिस्ट देखने लगे..
मैं थक कर बैठ गई लिस्ट काफी लम्बी थी.पर अम्मी लिस्ट देखती रहीं.
अचानक कुछ हुआ.वो एक दम रुक गईं.मैं उनके पास गई पूछा क्या हुआ अम्मी..
अम्मी ने कुछ नहीँ कहा बस मुझे गले लगाया और रोने लगी ....
अब मुझे यकीन हो चला था मामला कुछ सही नहीँ है..मेंने अम्मी से कहा मेंने सच मे इतना बुरा पेपर नहीँ किया था के मैं फैल हो जाऊँ ...
अम्मी ने तभी मुझे देखा और मेरे माथे पर प्यार किया....
कहा तुम फैल नहीँ तुमने टॉप किया है..देखो..
मेंने देखा लिखा था.
sara farooqui --- first with distiction.
और उस वक्त मुझे समझ नहीँ आ
रहा था मैं रीयेक्ट केसे करूँ???? नाचू या रोने लगूं..
पर ये समझ आ गया अम्मी की आँखो मॆ खुशी के आँसू थे...
मैं वो दिन कभी नहीँ भूल सकती....
आप भी अपने खुशी के पलों को शयेर कीजिये..
कॉमेंट कीजिये......
