Thursday, 5 January 2012

har blog kuch kehta hai......

कई लोगों को डायरी  लिखना बहुत  पसंद होता है..वेब के आने से पहले लोग डायरी में ही अपने दिल की बात लिख देते थे...लेकिन जैसे जैसे प्रोद्योगिकी का विकास हुआ.वेब की दुनिया में लोगों ने कदम रखा लोगों ने ऑनलाइन अपने विचार रखना शुरू किये....
          जी हाँ ब्लॉग एक तरह से ऑनलाइन डायरी ही है.भारत में पहला हिंदी ब्लॉग आलोक कुमार द्वारा
9 2 11 नाम से सन 2003 में लिखा गया.शुरू में डायरी की तरह ही लिखा.आलोक जी ने ही सबसे पहले ब्लॉग के लिए चिटठा शब्द प्रतिपादित किया.वर्तमान में उनका चिट्ठाजगत.कॉम काफी मशहूर ब्लॉग है.
             ये तो थी पहले ब्लॉग की शुरुआत.इसके बाद तो लोगों को जैसे ब्लॉग लिखने का चस्का ही लग गया.अब तो देश का युवा वर्ग भी इस और आ रहा है.साथ ही मीडिया के इस मैदान-ए-लेखन में बहुत से रचनाकारों के ब्लॉग भी देखने को मिलते है.कवियों,लेखकों से लेकर फ़िल्मी सितारों की भी इस इलाके में मुठभेड़ होना लाज़मी है.आज के समय में देखें तो कई ब्लॉग जैसे रवि रतलामी का  रचनाकार  ब्लॉग इसके अलावा मोहल्ला,भड़ास,मीडिया मीमांसा आदि कुछ प्रमुख ब्लॉग है.
                                    आज के समय में प्रमुख चिट्ठाकारों में आलोक कुमार,रवि रतलामी,अविनाश,बालेन्दु शर्मा धदीच,जीतेंद्र चौधरी और फ़िल्मी सितारों में अमिताभ बच्चन,आमिर खान,शाहरुख़ खान,अनुपम खेर आदि ने भी इस तरफ दस्तक दी है.
            अगर इसका दूसरा रुख करें तो हम देखते है कि हर ब्लॉग कुछ कहने कि कोशिश करता है जैसे कोई ब्लॉग के माध्यम से अपने विचार,भावों को रखता तो है लेकिन अलग अलग प्रकार से.जैसे कोई तकनीक के बारे में बताता है तो कोई देश के खास मसलों पर मन का विचारालय खोलता है.यानि अब ब्लॉग लिखना इतना लोकप्रिय हो रहा है कि अब राजनीतिक,सामाजिक,सांस्क्रतिक और पर्यावरण से जुड़े ब्लॉग भी सामने आये है.इसके अलावा तस्वीरों से जुड़े ब्लॉग भी हम देख सकते हैं (नई तस्वीर )
                    आज अगर हम देखें तो भारत में   हर रोज़ लगभग  50 ब्लॉग बन रहे हैं जिनको बनाने वाले अधिकतर छात्र ही हैं.जिससे महसूस होता है कि अब इस ओर अल्पविराम नही लगाया जा सकता और लगना भी नही चाहिए.हर छात्र कुछ कहना चाहता है ब्लॉग के माध्यम से.अपने विचार,भावों को संप्रेषित करने का ब्लॉग एक बहुत अच्छा माध्यम बन चुका है.
                           युवा खबर के माध्यम से मैंने  भी कुछ कोशिश की है अभी तो शुरुआत है..मेरे अलावा मेरे कुछ साथी जिनके भी मेरी तरह अभी नये ही बनाये हुए ब्लॉग हैं और आँखों में अभिलाषा है.वह भी समाज के सामने अपने विचार रखने का योगदान दे रहे हैं.उनकी भी मेरी तरह ही कहानी है...क्यूंकि हर ब्लॉग कुछ कहता है.............
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mass media in crisis

The role of mass media in crisis .......... Natural role of the mass media as a disaster when suddenly dancing orgy of mass destr...