Sunday, 30 October 2011

globel warming

क्या २०४० तक हिमालय के ग्लेशियर पूरे तौर पर खत्म हो जायेगे?यूँ तो ये एक अनुमान है लेकिन ये संभव भी हो सकता है.कारण है ग्लोबल वार्मिंग.आज के समय में ग्लोबल वार्मिंग भारत के लिए ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के देशो के लिए एक चुनौती  के रूप में सामने है.
वास्तव में ग्लोबल वार्मिंग वातावरण में फैल रहे प्रदूषण से हो रही है.वास्तव में जब जंगलो की कटाई होती है या ईधनों का अन्धादुंध प्रयोग किया जाता है तो वातावरण में कार्बन-डाई-ओकसाइड के साथ मिथेन गैसें भी फैल जाती है.पिछले २५-३० साल के दौरान ग्लोबल वार्मिंग तेज़ी से बड़ी है जिनमे इन्हीं ग्रीन हॉउस गैसों का रोल है. आज के समय में दुनिया के ग्लेशियर तेज़ी से पिघल रहे है और ३५-४० फिट घटते जा रहे है.इससे अंदाज़ा लगाया जा सकता  है कि अगले ५० साल में दुनिया का क्या हश्र होगा.इस सबके लिए ज़िम्मेदार हम सब है क्योंकि वनों को काटकर खत्म किया.ईधन का अंधाधुंन प्रयोग किया है.और इन हालात पर रोक हम ही लगा सकते है.इंशाल्लाह.                                                                                             

mass media in crisis

The role of mass media in crisis .......... Natural role of the mass media as a disaster when suddenly dancing orgy of mass destr...