Monday, 26 December 2011

JURM AUR MAHILAYEN.??????

जुर्म की दलदल से दूर रहने वाली महिलाएं भी अब इसमें धसती जा रही हैं.उत्तर प्रदेश में तो हाल बहुत बुरा है,वहां पुलिस के पास 3 दर्जन से ज्यादा ऐसी महिलाओं का रिकॉर्ड है जो हत्या समेत कई जुर्मों में शामिल रही हैं,,,,,,,,,,,


                          जुर्म की दलदल ऐसी अँधेरी सुरंग है,जहाँ से निकलना मुश्किल होता है और इसी दलदल में आज कल महिलाएं भी अपने हाथ आजमां रही हैं..
महिलाओं ने ये साबित किया है की नारी अब सिर्फ लाज शर्म और हत्या का नाम हइ नहीं रही बल्कि वह घर की चौखट से बाहर निकलकर हथ्यार भी लहरा रही है,पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कितनी ही महिलाऐं ऐसी हैं जो समाज के जो समाज के सामने कुछ ऐसी तस्वीर पेश कर रही हैं जो निहायत ही भयानक है.जहाँ कई महिलाओं ने अपने हाथ खून से रंग लिए तो कुछ ऐसी भी हैं जो जुर्म की बादशाह बनना चाहती हैं.ऐसी महिलाओं में उनका नाम सबसे आगे है जिनके पति पहले अपराध की दुनिया से जुड़े थे या अपराध के बेताज बादशाह थे......
                

लूट, हत्या,डकैती और अपहरण जैसे मामलों में औरतों की संलिप्तता पुलिस को भी सोचने को मजबूर कर रही है.मेरठ ज़ोन में ऐसी 3 दर्जन महिलाओं को चिन्हित भी किया जा चूका है.ये ऐसी महिलाऐं हैं जो अपराधियों के साथ कदम से कदम मिला कर चल रही हैं.
             क़त्ल के जुर्म में ऐसी 50 से ज्यादा महिलाऐं सैर कर चुकी हैं.जिस्म की हवस व पैसे की ललक ने ऐसी औरतों को 
अपराधी बना दिया.कुछ ऐसी भी हैं जिनके लिए पति परमेश्वर न होकर दुश्मन बन गये और उन्होंने अपने ही हाथों से अपनी मांग उजाड़ ली.
           सामाजिक रिश्तों की बुनियाद लगातार चटक रही है.खूबसूरत चेहरों के पीछे छुपे काले दिल की हकीकत ने कई लोगों की तो जान ही ले ली.महिलाओं के जरिये किये जा रहे अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है.पुलिस इसे चिंता का विषय मान रही है.क्यूंकि महिलाऐं उन्हें चकमा देने में माहिर होती हैं.
           हत्याओं के मामले में महिलाओं की आपराधिक दस्तक को मज़बूत कर दिया.इन पर अल्पविराम लगाना बहुत जरूरी है.खातील महिलाओं की सूचि तो बहुत लम्बी है.लेकिन चाँद घटनाओं पर ही गौर करने की ज़हमत की जाये तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं.
       कुछ साल पहले मेरठ के आदिवक्ता रशीद अली की हत्या का खूब चर्चा में रहा.दरअसल,उनकी पत्नी फरजाना के उत्तर प्रदेश पुलिस के एक दरोगा पंकज वर्मा से नाजायज़ ताल्लुकात थे.वह दोनों अपने संबंधों को और बढ़ाना चाहते थे,लेकिन इससे पहले इस बात की पहल हो पति रशीद उनकी राह का काँटा बन गया.इन दोनों ने मिलकर पहले पति रशीद की हत्या की फिर उसकी लाश को कार में ले जाकर रुड़की नहर में फ़ेंक आये.दोनों इस हत्या के आरोप में जेल जरुर गये,लेकिन कत्ल के आरोप में जेल की सलाखों के पीछे रह चुका दरोगा पंकज वर्मा अभी भी पुलिस की नौकरी बजा रहा है.ये अलग बात है की मामला अभी अदालत में विचाराधीन है.
                 मेरठ की ही एक महिला रा जेंद्री ने अपने अपने प्रेमी के साथ मिलकर अपने पति और सास ससुर की हत्या कर दी.सविता नामक एक महिला ने अपने प्रेमी विक्रांत को हमेशा के लिए पति सट्टे को ज़हर देकर मार डाला.जाहिदा परवीन ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति आकिल की हत्या कर दी.पति का गुनाह सिर्फ इतना था की वह पत्नी की बेलगाम हरकतों पर लगाम लगाने का प्रयास करता था.
                      मेरठ में संतोष नामक महिला ने अपने साथियों के साथ मिलकर अपने पुत्र की विवाहित युवा प्रेमिका की हत्या का प्रयास किया और उसकी बेटी को पेचकस से गोद कर मार डाला.
                   एक महिला ऐसी भी है जिसने जेल जाकर भी सबक नही लिया.2 साल पहले अनीता नामक नव विवाहिता ने ब्लैक मेल करने पर एक सूत व्यापारी की चाकुओं से गोद कर हत्या कर दी थी जिसके कारण उसे जेल भी जाना पड़ा था.ससुराल वालों ने उसे माफ़ कर दिया,लेकिन जेल से आकर वह दबंग और आपराधिक प्रव्रत्ति की हो गई.सास की बंदिशें उससे सहन नहीं हुई तो सहारनपुर में उसने अपनी सास की पेचकस से गोदकर हत्या कर दी.फिलहाल अनीता जेल से बाहर है.
                26 जून 2004 को सहारनपुर में चौकीदार राम स्वरूप की उसकी पत्नी शांति ने बेटे व दामाद के साथ मिलकर हत्या कर दी.शांति बुढ़ापे में विधवा इसलिए हुई क्यूंकि वह पति की जगह बेटे को नौकरी दिला कर शराबी पति लो सबक सीखाना चाहती थी.
                    इसी तरह बुलंद शहर में एक व्यापारी दीपक को उसकी ही साली चित्रा ने मार डाला और पति के साथ मिलकर शव को बाहर फ़ेंक दिया.इसी जिले में 3 साल पहले शिकार पुर में एक महिला डॉक्टर ने अपने अध्यापक प्रेमी के साथ मिलकर अपने डॉक्टर पति की ज़हर देकर व गला दबाकर हत्या कर दी थी.हलांकि प्रेमी ने उसकी संपत्ति हड़पने के बाद बेवफाई दिखाई और महिला को भी मौत की चौखट पर धकेल दिया था.
                   खून से हाथ रंगने में युवा स्कूली छात्राएं तक अछूती नहीं रही.मेरठ के चौधरी चरण सिंह की एक छात्रा सुलक्षणा ने ब्लैक मैलिंग से पीड़ित होकर अपने 2 छात्र दोस्तों के साथ मिलकर एक नकली सी.बी.आई. इंस्पेक्टर आमिर को बेरहमी से मार डाला.इतना ही नहीं उन्होंने बड़ी सफाई से लाश को भी ठिकाने लगा दिया.लेकिन तीनों कातिल पुलिस के शिकंजे में आ ही गये.
                    बागपत की एक युवती ने विवाह के एक सप्ताह बाद ही अपने प्रेमी के साथ मिलकर अपने पति का खून कर दिया.वह उसे हनीमून मनाने के बहाने जम्मू ले गई और एक होटल में उसे ठिकाने लगा दिया.
                               हत्याओं से अलग लूट,डकैती के साथ चोरी के मामलों में भी औरतों का हाथ समाज के लिए खतरे की घंटी साबित हो रहा है.जिसकी ख़बरें आये दिन मीडिया में आती रहती हैं.पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कुछ गिरोह ऐसे भी हैं,जो महिलाओं को अपने गिरोह में शामिल कर उन्हें अपराध के हथकंडे सीखाते हैं.अक्सर रेलों में वारदात करने वाला ज़हर खुरानी गिरोह भी महिलाओं का इस्तेमाल करता आया है.
              और कुछ देखे तो मेरठ में कार सवार महिलाओं ने एक सर्राफ से जेवरात लूट लिए लेकिन वह पकड़ी गई थीं.इन महिलाओं का अपराध से वास्ता यहीं ख़त्म नही हुआ बल्कि लूट के एक मामले में कुछ समय बाद ही उन्हें परतापुर पुलिस ने फिर से गिरिफ्तर कर लिया.ये गिरोह बनाकर लूट और चोरियां करती थी.
               इसी तरह एक महिला ने एक कार सवार से लिफ्ट ली और उससे हथियार की नोक पर नगदी लूट ली.28 अगस्त को खर्खोंदा के एक बैंक में घुसकर २ युवतीओं ने लोगों की जेबों पर हाथ साफ़ कर दिया.
                मेरठ पुलिस ने एक ऐसी तमंचा फैक्ट्री पकड़ी है जिसका संचालन खुद एक महिला ही कर रही थी.शामली में एक युवती एक डॉक्टर से चौथ वसूल करती पकड़ी गई.वह लोगों को अपहरण की धमकियाँ देकर धन  वसूला    करती थी.सहरान  पुर ने सट्टे के एक बड़े  रेकेट  का पर्दा  फाश  किया,जिसमे  1 लाख नगदी बरामद करने के साथ ही एक युवती समेत 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया.युवती मोनिका के तार एक सट्टा किंग से जुड़े थे और वह बी,ए. की छात्रा थी.पुलिस के मुताबिक वह खुद मोटर साइकिल पर घूम कर पैसा इकठ्ठा करती थी.
                     अपराध में महिलाओं की संलिप्तता बहुत कम होने की वजह से यूँ तो पुलिस में महिलाओं का आपराधिक रिकॉर्ड रखने की पम्परा नहीं थी लेकिन अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश उनका पूरा डाटा रख रही है और अब तक ऐसी 3 दर्जन से भी ज्यादा औरतों को चिन्हित भी किया जा चुका है जो पेशे वर होकर अपराध कर रही हैं.पुलिस अधिकारी मानते हैं की अपराध जगत से जुड़े लोग महिलाओं को ढाल बनाकर इस्तेमाल करते हैं.बखौल एक महिला पुलिस अधिकारी' ''अपराध करने वाली महिलाओं की मानसिकता को समझना मुश्किल काम है.उन्हें आमतौर पर रहमदिल माना जाता है और इसी के चलते वह छल करती हैं''.
                                      जिंदगी जीने के अंदाज़,आचार विचार और संस्कारों पर ध्यान दिया जाये तो अपराध की दलदल की तरफ बढ़ रहे महिलाओं के क़दमों पर अंकुश लगाया जा सकता है.मनोरोग चिकत्सों की माने तो महिलाओं में आपराधिक प्रव्रत्ति बढ़ रही है.महिला सशक्ति करण में नकरात्मक फैसला लेने की सोच ने भी जन्म लिया है.परिवर्तन के दौर में महिलाओं ने जीने का अंदाज़ बदला है.ऐसे में मानसिक रोगों को भी नकारा नहीं जा सकता.आसामान्य व्यवहार और आसामान्य मानसिक संतुलन भी इसके लिए ज़िम्मेदार हैं.

mass media in crisis

The role of mass media in crisis .......... Natural role of the mass media as a disaster when suddenly dancing orgy of mass destr...